विभिन्न समाजों की राजनीतिक संबद्धता:
मारवाड़ी समाज:- कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय।
सिंधी समाज:- कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय।
बिहारी समाज: - कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय।
उड़िया समाज: - कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय।
गुजराती समाज: - कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय।
पंजाबी समाज: - कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय।
अन्य परदेसिया समाज: - कांग्रेस और भाजपा दोनों में सक्रिय। यह दर्शाता है कि विभिन्न परदेसिया समाज राजनीतिक रूप से विभाजित हैं, लेकिन वे एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
*छत्तीसगढ़िया समाज* भी कांग्रेस और भाजपा दोनों में बंटा हुआ है, समाज का एक बड़ा हिस्सा अपनी पार्टी के प्रति "अंधभक्ति और चमचागिरी" में डूबा हुआ है।
*जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला महामंत्री कृतज्ञ पटेल* का मानना है कि छत्तीसगढ़ महतारी (छत्तीसगढ़ की पहचान/अस्मिता) के साथ एक "बड़ी घटना" (गला काट दिए गए) हुई है, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़िया समाज एकजुट नहीं हो पा रहा है।
इनका सवाल है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी छत्तीसगढ़िया समाज कब जागेगा...? यदि समाज अब भी नहीं जागता है, तो मेरा है कि "छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया" के नारे को संभाल कर रखा जाए, क्योंकि यह नारा तब तक सार्थक नहीं है जब तक समाज अपनी महतारी की रक्षा के लिए एकजुट न हो, आगे कृतज्ञ पटेल कहते है कि "हमारी महतारी का गला कट गया, फिर भी हमने कुछ नहीं किया," क्योंकि "पूरी दुनिया जानती है कि छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।" यह एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी है जो समाज की निष्क्रियता पर सवाल उठाती है। समाज राजनीतिक रूप से विभाजित हैं। छत्तीसगढ़िया समाज में पार्टी के प्रति अंधभक्ति और चमचागिरी की समस्या है। एक बड़ी घटना के बावजूद समाज एकजुट नहीं हो पा रहा है। "छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया" के नारे की सार्थकता पर सवाल उठाया गया है।
इसी कड़ी में कृतज्ञ पटेल ने समाज से एकजुट होने और अपनी पहचान की रक्षा करने का आह्वान किया है।

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